लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत के साथ एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। इस अवसर पर एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले 172 किसानों को विशेष उड़ान से लखनऊ लाया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे मुलाकात की और जेवर एयरपोर्ट की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब राज्य सरकार ने जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने का फैसला किया था, तब भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया था। शुरुआती दौर में किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं थे और उन्होंने प्रस्ताव को सीधे तौर पर ठुकरा दिया था।
पहले किसानों ने साफ कहा था- जमीन नहीं देंगे
मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ संवाद के दौरान कहा कि कैबिनेट से जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रशासन को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि तय समय सीमा बीतने के बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई।
इसके बाद उन्होंने खुद हस्तक्षेप करने का फैसला किया और ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में किसानों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री के अनुसार, बैठक में मौजूद करीब 100 किसानों से जब एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन देने की बात कही गई तो जवाब मिला कि वे अपनी जमीन नहीं देंगे।
एक घंटे की बातचीत ने बदल दी तस्वीर
सीएम योगी ने बताया कि उन्होंने किसानों से कहा कि यह परियोजना पूरे क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदल सकती है। उन्होंने किसानों, खासकर बुजुर्गों को समझाते हुए कहा कि विकास के अवसर बार-बार नहीं आते और जो समय की मांग को समझकर आगे बढ़ता है, वही इतिहास रचता है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने किसानों को विश्वास दिलाया कि एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र में विकास, रोजगार और नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। अंततः किसानों ने सरकार पर भरोसा जताया और परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर सहमति दी।
आज उसी भरोसे ने रचा नया इतिहास
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के सहयोग और विश्वास का ही परिणाम है कि चार चरणों में विकसित होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है और आज नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 13 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित होने वाले इस एयरपोर्ट ने जेवर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
पहली कमर्शियल उड़ान के साथ बना ऐतिहासिक पल
सोमवार को जेवर एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ानों का औपचारिक संचालन शुरू हुआ। सुबह लखनऊ से पहली उड़ान जेवर पहुंची, जिसके बाद जेवर से लखनऊ के लिए पहली उड़ान रवाना हुई। इस विशेष उड़ान में एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले 172 किसान सवार थे।
लखनऊ पहुंचने पर किसानों का स्वागत किया गया और मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने किसानों के योगदान को एयरपोर्ट परियोजना की सफलता का सबसे अहम आधार बताया।
‘जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन सरकार अपने संकल्पों को धरातल पर उतारने का काम करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और किसानों के सहयोग से आज जेवर एयरपोर्ट का सपना साकार हुआ है।
उन्होंने प्रदेशवासियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि विकास, विश्वास और जनसहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
